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Prof U R Rao Dr. Vikram Sarabhai

मुखपृष्ठ : हमारे बारे में : निदेशक : भूतपूर्व निदेशक : प्रो. यू.आर. राव

गत अद्यतन: 1-Apr-2015


प्रो. यू.आर. राव

[अवधि : 1976-1985S]

स्वर्गीय प्रो. यू.आर. राव अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं, उन्होंने भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में संचार एवं सुदूर संवेदन के विस्तृत अनुप्रयोग के लिये मौलिक योगदान दिया । वे यू.आर.एस.सी. के प्रथम निदेशक थे। 1976 से 1985 तक केन्द्र के निदेशक के रुप में अपने कार्यकाल में, वे देश में उपग्रह प्रौद्योगिकी के विकास में अग्रणी पथ प्रदर्शक रहे। द्रुत विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग की अनिवार्य आवश्यकता की जरूरत को समज्ञकर, प्रो. राव ने 1972 में भारत में उपग्रह प्रौद्योगिकी की स्थापना के लिये ज़िम्मेदारी ली। उनके मार्गदर्शन में, 1975 में प्रथम भारतीय उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ संचार, सुदूर संवेदन तथा मौसम विज्ञान सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए 18 से भी ज़्यादा उपग्रहों की अभिकल्पना एवं प्रमोचित की गई।

1984 में अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग एवं सचिव, अंतरिक्ष विभाग के रुप में कार्यभार संभालने के उपरांत, प्रो. राव ने रॉकेट प्रौद्योगिकी के विकास को आगे बढ़ाया । परिणामस्वरुप ए.एस.एल.वी. रॉकेट तथा प्रचालनात्मक पी.एस.एल.वी. प्रमोचन यान जो ध्रुवीय कक्षा में 2.0 टन श्रेणी के उपग्रहों को प्रमोचित कर सकता है का प्रमोचन सफलता पूर्वक किया गया।
प्रो. राव ने 1991 में भू-स्थिर प्रमोचन यान जी.एस.एल.वी. के विकास एवं निम्नतापीय (क्रायोजेनिक) प्रौद्योगिकी के विकास की शुरूआत की।

वर्तमान में वे अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के शांसकीय परिषद के अध्यक्ष हैं। एम.आई.टी. में संकाय सदस्य के रुप में कार्य करने के उपरांत डल्लास के टेक्सास विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर रहे जहाँ उन्होंने कई अग्रणी तथा अन्वेषक अंतरिक्षयानों पर प्रमुख प्रयोगकर्ता के रुप में अन्वेषण किए, प्रो. राव 1966 में भारत वापस लौटे और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद के प्रोफेसर बने।

प्रो. राव ने कॉस्मिक किरणें, अंतरग्रहीय भौतिकी, उच्च ऊर्जा खगोलिकी, अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं उपग्रह तथा रॉकेट प्रौद्योगिकी विषयों पर 350 से भी अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख प्रकाशित किए हैं और कई किताबें लिखी हैं। वे 21 से भी अधिक विश्वविद्यालयों से डी.एस.सी. (मानद डाक्टरेट्) के भी प्राप्त कर्ता है, जिनमें यूरोपका सबसे पुराना विश्वविद्यालय, बोलोगना विश्वविद्यालय भी शामिल है।