मुखपृष्ठ : हमारे बारे में : निदेशक : श्रि एम. शंकरन,

गत अद्यतन: 01-Sep-2026


श्रि एम. शंकरन

[अवधि : 2021-2026]

श्री एम. शंकरन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विशिष्ट वैज्ञानिक हैं। उन्होंने 01 जून 2021 से 31 अगस्त 2026 तक यू. आर. राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी); जो इसरो के सभी उपग्रहों के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए देश में एक अग्रणी केंद्र है, के निदेशक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने संचार, नौवहन, सुदूर संवेदन, मौसम विज्ञान और अंतरग्रहीय अन्वेषण के क्षेत्रों में राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपग्रहों के निर्माण में उपग्रह समुदाय का नेतृत्व किया।

उन्होंने वर्ष 1986 में भारतीदासन विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त करने के बाद इसरो उपग्रह केंद्र (आईजैक), जिसे वर्तमान में यू. आर. राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) के नाम से जाना जाता है, में कार्यभार ग्रहण किया।

निदेशक, यूआरएससी का पदभार ग्रहण करने से पहले, वे यूआरएससी में संचार एवं पावर प्रणाली क्षेत्र के उप निदेशक के रूप में कार्यरत थे और इसके विकास कार्यों का नेतृत्व कर रहे थे। यूआरएससी/इसरो में 37 वर्षों के 120 से अधिक उपग्रहों पर कार्य करने के अपने समृद्ध अनुभव एवं विशेषज्ञता के दौरान, निम्न पृथ्वी कक्षा उपग्रहों, भू-स्थिर उपग्रहों, नौवहन उपग्रहों तथा चंद्र मिशनों, मंगल ऑर्बिटर मिशन, एस्ट्रोसैट और अनुवर्ती मिशनों-जैसे अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों के लिए सौर व्यूहों, पावर प्रणालियों, उपग्रह स्थिति निर्धारण प्रणाली और आर एफ संचार प्रणालियों के क्षेत्रों में योगदान दिया।

उन्होंने इसरो के उपग्रहों के लिए 70V बस के सफल निर्माण तथा चंद्रयान-1 एवं 2, मंगल ऑर्बिटर मिशन, एस्ट्रोसैट आदि जैसे अंतरग्रहीय मिशनों के लिए पावर उत्पादन एवं वितरण प्रणालियों के विशिष्ट डिजाइन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देश में सौर पैनलों, बैटरी प्रणालियों आदि के निर्माण एवं परीक्षण के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने नई तकनीकी प्रगति को अपनाने में केंद्र का नेतृत्व करते हुए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट मृदु अवतरण की ऐतिहासिक उपलब्धि, आदित्य-एल1, सूर्य के अध्ययन के लिए भारत के प्रथम वैज्ञानिक मिशन तथा एक्सपोसैट पोलरीमेट्री मिशन की सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने ई ओ एस-08 (माइक्रोसैट-2सि) मिशन में उन्नत अनुसंधान एवं विकास के प्रदर्शन, स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पेडेख्स्) मिशन के कक्षा में प्रदर्शन, जो भविष्य के चुनौतीपूर्ण मिशनों के लिए अग्रदूत के रूप में कार्य करेगा तथा भारत-अमेरिका के संयुक्त विकास वाले निसार (निसार) मिशन में यूआरएससी की टीम का नेतृत्व किया।

निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, वे मानव अंतरिक्ष उड़ान-गगनयान, चंद्रयान के अनुवर्ती मिशनों-लूनर सैंपल रिटर्न मिशन तथा चंद्रमा पर कर्मीदलयुक्त मानव अवतरण, मंगल अवतरण मिशन तथा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे विभिन्न प्रतिष्ठित अंतरिक्ष मिशनों की दिशा में केंद्र का नेतृत्व कर रहे थे। उनके नेतृत्व में, उपग्रह केंद्र ने चंद्रयान-3 लैंडर के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल अवतरण तथा स्पेस डॉकिंग प्रयोग जैसी महत्त्वपूर्ण खगोलीय उपलब्धियाँ हासिल की, जिससे इसरो और राष्ट्र गौरवान्वित हुए तथा वैश्विक मंच पर केंद्र की उत्कृष्टता का प्रदर्शन हुआ।

उन्होंने तकनीकी एवं वैज्ञानिक सम्मेलनों के अवसर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विभिन्न व्याख्यान एवं संबोधन दिए हैं। उन्होंने छात्र-समुदाय को आशाजनक अंतरिक्ष विज्ञान तथा स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा के लिए प्रेरित किया।

उन्हें वर्ष 2017 के लिए इसरो के प्रदर्शन उत्कृष्टता पुरस्कार, वर्ष 2017 एवं 2018 में इसरो टीम उत्कृष्टता पुरस्कार तथा वर्ष 2023 के लिए ए एस आई-आर्यभट्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनके नाम सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में लगभग 50 प्रकाशन हैं।

श्री एम. शंकरन इंडियन सोसाइटी ऑफ सिस्टम्स फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग के सदस्य/फेलो, इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स, इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स तथा एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के फेलो हैं।